Success Story

Success Story - 1

खेती व सह व्यवसाय (मधुमक्खी पालन) पर सफलता की कहानी

डा. अरविन्द कुमार एवं डा. आर. के. सिंह, कृषि विज्ञान केन्द्र, मुरादाबाद
(स.व.भा.प. कृषि एवं प्रौ. वि. वि., मेरठ) उ. प्र.

कृषक का नाम : श्री राजपाल सिंह
पिता का नाम : श्री होरी सिंह
ग्रा. : खानपुर
पो. : सराय ज्वालापुरी
जिला : मुरादाबाद
फोन नं. : 8650712817
शैक्षिक योग्यता : जूनियर हाईस्कूल
आयु. : 50 वर्ष
कृषि योग्य भूमि : 4.0 एकड

श्री राजपाल सिंह का मुख्य व्यवसाय कृषि है तथा यह काफी लम्बे समय से कृषि करते आ रहे है । इनकी मुख्य फसलें धान, गेहूॅ, सरसों, उर्द है । परन्तु इन फसलों की खेती करने से श्री राजपाल सिंह को काफी मेहनत करने के बाद भी आपेक्षित लाभ नही मिल पाता था । अतः इनके दिमाग में खेती के साथ-साथ खेती से ही जुडा हुआ कोई अन्य व्यवसाय करने की बात आई। कोई अन्य व्यवसाय करने की बात सोचकर इन्होने कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क किया । केन्द्र के कृषि वैज्ञानिकों से विचार विमर्श किया तो वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी पालन करने की सलाह दी । तो इन्होने 2009 में 5 बाॅक्स से शुरूआत की परन्तु इन्हे आपेक्षित लाभ नही मिल सका तब इन्होंने डा0 अरविन्द कुमार, वैज्ञानिक पादप सुरक्षा से वार्ता की । डा0 अरविन्द कुमार ने बताया कि हम रोजगार परक प्रशिक्षण के अन्तर्गत एक सप्ताह का मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देते है । अतः श्री राजपाल सिंह ने वर्ष 2012 में प्रशिक्षण प्राप्त कर मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू किया । कार्य प्रारभ्भ करने के उपरान्त बहुत सी समस्याये इनके सामने आयी जैसे - मधुमक्खियों की बीमारी, मधुमक्खी की अच्छी प्रजाति का न मिलना, कृत्रिम भेजन को समय पर न देना, माईग्रेशन न कराना, सफाई पर विशेष ध्यान न देना आदि, परन्तु ये समय-समय पर केन्द्र पर कार्यरत डा0 अरविन्द कुमार से वार्ता कर मधुमक्खी पालन से सम्बन्धित समस्याओं का समाधान करते रहे । केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा भी इनके यहाॅ भ्रमण किया गया । वर्ष 2015-16 में इनके पास 150 बाक्स थे। जो वर्ष 2016-17 में बढकर 200 बाॅक्स हो गये है । तथा अच्छी गुणवत्तायुक्त शहद का उत्पादन कर रहे है । वर्ष 2015-16 में इनका शहद उत्पादन 52.50 कु0 हुआ तथा 37.5 किलो0 मोम उत्पादन भी हुआ जिसका मुल्य रू0 536250.00 तथा शुद्व आय रू0 311250.00 प्राप्त हुई।

आय में वृद्वि - इस प्रकार विगत वर्षो में खेती से आय रू0 138400.00 तथा खेती के साथ सह व्यवसाय के रूप में मधुमक्खी पालन से रू0 311250.00 प्राप्त हुये । इस प्रकार कुल आय एक वर्ष में रू0 449650.00 प्राप्त हुये ।

प्रसार - इनके मधुमक्खी पालन के कार्य को देखकर गाॅव के चार कृषक तथा आस-पास के ग्रामों में भी मधुमक्खी पालन का कार्य चल रहा है । इस प्रकार खेती के साथ-साथ उक्त सह व्यवसाय को अपनाने के लिये मेरे द्वारा भी तथा कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा भी प्रेरित किया जाता है। ताकि मेरी तरह अन्य कृषक भाईयों की आय में बढोत्तरी हो सके ।

प्रशस्ति पत्र - मेरे कार्य को देखते हुये केन्द्र द्वारा वर्ष 2016 में मुझे प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया ।


खेती के साथ सहव्यवसाय (मधुमक्खीपालन) का आर्थिक मूल्यांकन खेती से आय - (2015-16)

खरीफ
धान हाइब्रिड (च्भ्ठ.71) 2.0 एकड 22 44 1250 55000 24000 (12000 प्रति एकड) 31000
उर्द (अलंकार) 2.0 एकड 4.8 9.6 5500 52800 16000 (8000 प्रति एकड) 36800
रबी सीजन
गेहूॅ (च्ठॅ.550) भूसा 3.0 18 54
50 कु.
1500 81000 42000 ;140 प्रति एकडद्ध 39000
20000
सरसों (क्रांति) 1.0 6.0 6 3400 20400 9000 (9000 प्रति एकड) 11600
कुल आय 138400

मधुमक्खीपालन से आय

बाॅक्स सं. उत्पादन किग्रा./वर्ष मोम उत्पादन किग्रा./वर्ष बिक्री दर शहद बिक्री दर मोम कुल आय शहद + मोम लागत/वर्ष शुद्व आय
150 5250 37.5 100 300 525000 + 11250 : 536250 225000 311250

कुल आय शुद्व = रू. 138400 + 311250 = 449650.00


Success Story - 2

Successful cultivation of intercrops in Autumn Sugarcane

Dr. A. K. Mishra & Dr. R. K. Singh

Sri Sarnam Singh S/O Sri Itwari Singh resident of village Khanpur, Block Bilari, Distt. - Moradabad having about 5.0 Acres of land, come in contact with Krishi Vigyan Kendra, Moradabad in the year of 2012-13 and he was advised to grow Autumn sugarcane with intercrop in crop rotation to get better income from his farm. With this new technology, germination of sugarcane improved from 60-70% and ultimately got higher yield of sugarcane. Farmer was suggested to take such intercrops which having higher market demand like Garlic, Mustard, Potato etc. He was able to obtain additional income by growing intercrops in autumn sugarcane as compare to sole crop, but best results were obtained with sugarcane + garlic 2014-15 & 2015-16.

These intercrops proved highly beneficial in besides giving good economic return. The productivity of the system and economic is given below .


Table No. 1 : Economics of Different Intercropping Systems

Year Intercropping System Yield (q/ha.) Gross return (Rs./ha.) Total Expenditure (Rs./ha.) Net Return(Rs./ha.) B:C: Ratio
2013-14 S.cane + Mustard
S.cane + Potato
S.Cane : 675.50, 756.65
Intercrop : 15.50, 223.50
219308
248565
112425
125425
113825
123140
1:1.95
1:1.98
2014-15 S.cane + Mustard
S.cane + Garlic
S.Cane : 672.50, 684.50
Intercrop : 15.75, 102.50
242275507255 123325
186780
123625
320475
1:1.96
1:2.72
2015-16 S.cane + Garlic
S.cane + Mustard
S.Cane : 683.65, 678.50
Intercrop : 97.65, 17.25
605950
274103
224550
138124
381400
135979
1:2.70
1:1.98

Salient Observation from Different System

Sugar Cane + Mustard : Intercropping of mustard with sugar cane is becoming very popular in the district.

  • The most optimum time of sowing both the crops is first for night of October.
  • The sugarcane germination within 3-4 weeks, but in the month of Nov. The S.cane crop has remains dormant till February and this character facilities growth of Mustard.
  • The mustard is harvested by mid march when temperature rices.
  • The yield of mustard is up to15.75 q/ha. as additional production.

  • Sugarcane + Potato

    Intercropping of sugarcane + Potato is also very profitable. In this system sugarcane is planted at 90 cm. distance in Ist week of october and one row of Potato is planted between two row of sugarcane. Sugarcane crop is irrigated as per need of potato crop potato yield obtained from intercropping system in term of economically the net profit for both crops is Rs. 1,23140/- ha. & B.C. ratio is 1.98 respectively. Based on the existing agronomy, the potato based intercropping is not easy and not be common practice.


    Sugarcane + Garlic

    As the spices (garlic + onion) are very remunerative one labour intensive, their intercropping in autumn sugarcane my increase the income level as well as employment potential for small farmers. second thinks, these crop also posses peculiar odeeur which may serve as a repellent to the insect - pests of sugarcane (Verma etal., 1981) observed significant reduction in Top borrer incidence. When garlic was intercropped with sugarcane crop.

    In case of Garlic + sugarcane intercropping system, planting of sugarcane is done in the month of October and simultaneously cloves of garlic are manually planted on the bed in row and field is immediately irrigated. Garlic yield from Sugarcane + Garlic intercropping system ranges from 102.5q/ha. and 97.65 q/ha. in the year of 2014-15 & 2015-16, in term of economic purpose the highest net return received in sugarcane +garlic intercropping system Rs. 3,20475/- (2014-15) & 381400/- (2015-16) and B.C. Ratio is also higher as compare to other intercropping system 1:2.72 (2014-15) & 1:2.7. (2015-16)respectively.


    Horizontal spread of Technology

    S.N. Year Intercropping System No. of Village No. of Farmers Area (ha.)
    1 2013-14 Sugarcane + Mustard
    Sugarcane + Potato
    Sugarcane + Garlic
    19
    07
    12
    56
    19
    25
    116
    22
    51
    2 2014-15 Sugarcane + Mustard
    Sugarcane + Potato
    Sugarcane + Garlic
    65
    29
    14
    122
    66
    27
    276
    127
    43
    3 2015-16 Sugarcane + Mustard
    Sugarcane + Potato
    Sugarcane + Garlic
    125
    42
    19
    375
    161
    32
    525
    352
    66

    Now Sri Sarnam Singh is fully satisfied with this technology and continuously growing various intercrops in autumn planted sugarcane and getting higher net returns from this system (Table No. 1) the is helping KVK in organizing various transfer of technological activities.